Personality Development in Hindi | व्यक्तित्व विकास के टिप्स जानिए

Personality Development in Hindi: प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को अपने हिसाब से गढ़ता है और गढ़ने के बाद अगर उसे लगता है कि यह अच्छा नहीं है, तो वह खुद में बदलाव करने के बजाय दूसरों को इसका दोषी ठहराने लगता है।

वास्तव में तब तक कुछ नहीं बदलता, जब तक हम खुद को नहीं बदलते. जिंदगी को देखने का चश्मा ही अगर गलत पहना हो, तो हर रंग बदरंग लगेंगे ही।

तो आज मैं इस Article में Personality Development In Hindi share कर रहा हूं जो आपको एक आकर्षक व्यक्तित्व बनने में मदद कर सकता है।

Personality Development In Hindi

 ज्यादा अपेक्षाएं न पालें

अधिकतर लोग दूसरे लोगों के व्यवहार व विचारों की वजह से परेशान व क्रोधित होते रहते हैं. ऐसा करके वे सिर्फ अपना समय और ऊर्जा खर्च करते हैं. सामनेवाले को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

आखिर हमें ऐसा क्यों लगता है कि हम दूसरों को बदल सकते हैं? दूसरे की भी तो सोच हमारी तरह स्वतंत्र होगी, लेकिन हम यह मानने को तैयार ही नहीं होते।

बस एक ही रट लगाये रहते हैं कि आखिर फलां ऐसा कैसे कह सकता है या वह इतना कठोर कैसे हो सकता है,आदि. दरअसल ज्यादातर लोग व्यावहारिक ढंग से सोचने के बजाय भावनात्मक तरीके से सोचते और व्यवहार करते हैं।

ऐसे में जब कोई दूसरा हमारी इन भावनात्मक जरूरतों पर प्रहार करता है, तो हम नकारात्मक प्रतिक्रिया देने लगते हैं. यह सही नहीं है।

सही दिशा में सही सोचना

हर इंसान अपनी स्थिति के हिसाब से जीता है और किसी टूसरे के हिसाब से खुद को बदलना उसके लिए मुश्किल होता है. इसी कारण जब दूसरे उससे बदलने की अपेक्षा रखते हैं।

तो गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं और संबंध टूटने के कगार पर आ जाते हैं, बेहतर होगा कि दूसरे की स्थितियों के अनुसार सामंजस्य बिठाया जाये. देखने का नजरिया बदलते ही चौजें अलग दिखायी देने लगी ।

नकारात्मक चीजें सकारात्मक दिखेंगी और लोगों की कमियां उनकी वियां बन जगी सही दिशा में खूबियां तरीके से सोच कर ही हम अपने साथ साथ अपने आसपास भी खुशियां कैला सकते हैं।

खुद का विश्लेषण जरूरी

हमें खुद का विश्लेषण करना चाहिए. अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने का निरंतर प्रयास करना चाहिए. इसके लिए दिल और दिमाग में संतुलन होना जरूरी है।

एक क्रमबद्ध जीवनशैली भी. गहराई से अपना तो आकलन करके ही हम सही दिशा में बढ़ सकते हैं और आप सकारात्मक नजरिया पा सकते हैं।

हमारी सोच ही यह तय पार करती है कि हमारे आसपास की परिस्थितियां हमारे अनुकूल होंगी या प्रतिकूल. जब आप सकारात्मक ढंग से सोचने लगते हैं और अपनी गलतियों की जिम्मेदारी खुद लेने लगते हैं।

तो कई बार हार व निराशा भी आपके पक्ष में काम करने लगती है. जिम्मेदारी लेने का अर्थ ही है अपनी परेशानियों व दुखों के लिए दुनिया को दोष देना बंद कर देना।

दुनिया को अपने अनुसार ढालने के बजाय अपने विचारों को बदलें और हर सकारात्मक ढंग में ढलती जायेगी और दुनिया से भी कोई शिकायत नहीं रहेगी।

 ब्लेम गेम से बचें

किसी दूसरे व्यक्ति के व्यवहार या सोच को बदलने के लिए कोई जादू की छड़ी नहीं है. यह धीरे-धीरे समय के साथ संभव होता है, वह भी तब जब आप उसे फुल सपोर्ट करें।

जब आप यह कहते हैं कि काश उसने ऐसा न किया होता या मुझे यकीन नहीं होता कि वह ऐसा कर सकता है, तो यह कहने से पहले अपने विचारों पर अंकुश लगाकर कुछ पल ठहरें और दूसरे के नजरिये से उसके व्यवहार को परखें, जिस दिन आप दूसरों के नजरिए का फैसला करना छोड़, अपनी विचारों का निर्धारण करना शुरू कर देंगे।

उसी दिन से दुनिया आपके लिए बदली हुई और खूबसूरत हो जायेगी।

आज व्यक्ति का मनोविज्ञान या सोच बाहरी स्थितियों द्वारा ज्यादा नियंत्रित होता है और आंतरिक स्थितियों द्वारा कम लोग चाहते हैं कि उनकी जिम्मेदारियां कोई दूसरा पूरा कर दे।

वे खुद जिम्मेदारियों से बचे रहना चाहते हैं. कारण, वर्तमान में तनाव व असुरक्षा का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया है. दूसरी ओर, आत्म सम्मान का स्तर घट गया है।

इसी वजह से खुद को बदलने की जिम्मेदारी भी अक्सर लोग दूसरों पर डाल देते हैं. आज व्यक्ति का एटीट्यूड ब्लेम गेम जैसा हो गया है यानी मैं सफल नहीं हुआ या मेरे साथ जो भी गलत हो रहा है उसका कारण दूसरा व्यक्ति है।

खुद की कमियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय हम अपनी नाकामयाबियों के लिए दूसरों को गलत ठहराने की कोशिश में वक्त बर्बाद करते रहते हैं।

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